One of my favorite scenes ever, The ingenious dialogue delivery of Dev Saahab leaves us speechless. And the seemingly endless lines are done in a single take !!! :O
With this, I pay my sincere tribute to Dev Saahab …the man who go beyond words
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(knock knock knock)
रोज़ी: एक मिनट राजू |
राजू: इस शहर के जवान दिल को जिसकी पायल की शोख़ झन्कार ने गुदगुदा दिया है, कोई बता सकता है कला की वो मशहूर पुजारिन मिस नलिनी कहाँ रहती हैं?
रोज़ी: और, मैं पूछ सकती हूँ ये कौन जानना चाहता है?
राजू: जी बन्दा मामूली सा गाइड है, नाम राजू काम जनता की सेवा …जनता भी वो जो सैर सपाटे के साथ साथ अपना ज्ञान बढाने का शौक़ रखती हो …हे हे हे, सेवा क्या जी कि मैं उनकी आँख बन जाता हूँ और अपने दिल से नज़ारों को रंगीन बना बना कर उनके सामने हाज़िर करता रहता हूँ, हो सकता है इससे सच में झूठ और झूठ में सच की मिलावट हो जाती हो, लेकिन क्या कीजियेगा ज़माना ही मिलावट का है, बिना मिलावट के तो आजकल घी भी खुशबू नहीं छोड़ता है और आदमी का तो कहना ही क्या, जितनी मिलावट होगी उतना ही खरा समझा जाता है, हे हे हे. ख़ैर मैं भी क्या किस्सा ले बैठा, खुलासा ये कि मैं अपना फ़न मिस नलिनी की ख़िदमत में ख़र्च करना चाहता हूँ, अगर वो मौजूद हों और इनायत फरमायें तो |
रोज़ी: मुझे अफ़सोस है मिस नलिनी इस वक़्त थकी हैं, आराम फरमा रही हैं | आप फिर किसी दिन तशरीफ़ लाइये |
राजू: हे हे, आपकी तारीफ़ ? आपकी तारीफ़ ?
रोज़ी: नाम रोज़ी, काम नलिनी जी की सेवा | मगर …आपको तो उन्हीं से काम था ना ?
राजू: कहा ना आपसे, ज़माना मिलावट का है, मुझे नलिनी में रोज़ी की और रोज़ी में नलिनी की मिलावट नज़र आती है, नलिनी नहीं तो रोज़ी ही सही, मेरा काम चल जायेगा |
रोज़ी: काम ?!!
राजू: जैसा मैंने आपसे कहा मेरा काम है अपनी आँखों से दूसरों को दिखाना, टूटे हुये खण्डहराहत में इतिहास दिखा देना | जी मैं ज़ुबान से लफ़्ज़ों की तस्वीर खींचता हूँ | अतीत तो सब दिखाते हैं !! …मैं कभी कभी भविष्य भी दीखता हूँ, हा हा हा |
(Followed by him awesomely rolling a cane in his fingers) ”









